Wednesday, March 25, 2015

या ख़ुदा मेरी  आज़माइशें टाल दे
मुझे मुश्किलों से बाहर निकाल दे।
अपनी रहमतों का  साया दे मुझे
हर वक़्त मुझे न उलझे सवाल  दे।
चुन चुन कर हर दर्द तू दे दे मुझे
ख़ुशी भी मगर कोई बेमिसाल दे।
मुझको भी साहिलों की तलाश है
क़िश्ती  मेरी  भंवर से निकाल दे।
ख़्वाहिश है पहुंचू मैं भी मुक़ाम पे
हौसलों को मेरे कोई  नई चाल दे।
मेरी नमाज़ या पूजा तेरे हवाले है
ज़िंदगी से  मेरा  रिश्ता बहाल दे।
कोई तौफ़ीक़ मुझको भी अता कर
मुझे तू अपनी आरज़ू ए विसाल दे। 

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-03-2015 को चर्चा मंच की चर्चा गांधारी-सा दर्शन {चर्चा - 1929 } पर दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. बहुत ख़ूब
    http://savanxxx.blogspot.in

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