Thursday, February 27, 2020


होली पर तिरोहे
इस बार आऊँगा होली में छुट्टी ले के एक महीने की
खूब खेलेंगे मिलकर हम होली लठमार बरसाने की
ख़बर कुछ इस तरह भेजी थी उसने अपने आने की

वो आ जाता तो खेलते होली हम सब बरसाने की
दिल में कमी खल रही थी उसके ही न आने की
उसकी आदत न गई अब तक मुझको तरसाने की
ढोल नगाड़े होली के भी बजकर अब तो शांत हुए
घर आंगन बाट जोह रहे हैं अब भी उसके आने की
कसर न छोड़ी उसने कोई भी मुझको आजमाने की
डॉ सत्येन्द्र गुप्ता नजीबाबाद जिला बिजनौर