Saturday, November 24, 2012

तुम उजालों के नाम हुए
हम अँधेरे में बेनाम हुए !
वफ़ा की रस्म निभाते रहे
और इश्क़ में नाकाम हुए !
अपने शहर में नेक नाम थे
तुम्हारे शहर में बदनाम हुए !
इतनी लुटाई दौलते -दिल
कि आख़िर में नीलाम हुए !
सहरा हूँ प्यास हं कौन हूँ मैं
ख़ुद की नज़र में बेदाम हुए !
हमें हमारे ही ग़म ने काटा
रफ़्ता रफ़्ता हम तमाम हुए !

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