Khuch baatein unkahi
Monday, December 27, 2010
बीते लम्हों से जो बात हुई
बीते लम्हों से जो बात हुई
लगा उनसे मुलाक़ात हुई।
कौन छूकर फिर गुजरा है
रूह की दिल से ये बात हुई।
पोर पोर जलाती दुपहरी में
चिनारों पे जैसे बरसात हुई।
मेरा दिल तेरी पनाह में है
आज भी उनसे यही बात हुई।
वक़्त का पता ही न चला
कब दिन बीता कब रात हुई।
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