Khuch baatein unkahi
Monday, February 20, 2012
लिए हाथ में कटोरा भिखारी मांग रहा है नोट
दिल में मगर उसके जरा सा भी नहीं है खोट।
अपनी अपनी भीख है, अपना अपना कटोरा
भिखारी तो भिखारी है, वो नोट मांगे या वोट।
1 comment:
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
February 20, 2012 at 10:01 PM
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ओम् नमः शिवाय!
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ!
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बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteओम् नमः शिवाय!
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ!