Saturday, February 2, 2013

पिछले जन्मों की क़िताब किसने देखी
थी वो कितनी लाजवाब किसने देखी !
याद कोई नामो निशान शेष नहीं है
वो नाव होती गर्क़ाब किसने देखी !
आंखे वो लब , चेहरा और वो रंगत
किसमे थी कितनी आब किसने देखी !
जिन्हें छोड़ कर चला आया था कभी
वो बस्तियां भी बेताब किसने देखी !
उम्र तमाम सजने संवरने में लगे रहे
वो मिट्टी अपनी बेआब किसने देखी !
जहां भी गये नसीब अपना साथ ले गये
सहरा में फसलें शादाब किसने देखी !
फ़रिश्ते ही चखा करते थे बस जिसको
कैसी थी वो आबे -शराब किसने देखी !
बस दो चार घडी का ही खेल है जिंदगी
यह जिंदगी फिर ज़नाब किसने देखी !
आबे - शराब ------सोमरस

Friday, February 1, 2013

मन लगा यार फ़कीरी में
क्या रखा दुनियादारी में !
कुछ साथ नहीं ले जायेगा
क्या रखा चोरा चारी में !
वो गुलाब बख्शिश में देते हैं
जब भी मिलते हैं बिमारी में !
फ़िर हिसाब फूलों का लेते हैं
वो ज़ख्मों की गुलकारी में !
किस किस को समझाओगे
कुछ नहीं रखा लाचारी में !
धूल उड़ाता ही गुज़र गया
तो क्या रखा फनकारी में !
मैं झुककर सबसे मिलता हूँ
कुछ दम है मेरी खुद्दारी में !

Wednesday, January 23, 2013

ख़ुशबू उनकी जाफ़रानी है
चेहरे पर अज़ब नदानी है !
गालों पर दहकते हैं पलाश
शबाब उनका बे बयानी है !
चरचा पहुंचा चाँद पे उनका
लगा चाँद रु ब रु बेमानी है !
शब् ने चाँद से कहा हंसकर
तेरी चांदनी तो ये पुरानी है !
चाँद बोला,मेला दो घडी का है
यह माना रुत बड़ी सुहानी है !
उम्र तो रवानी है मौजो की
नहीं रहती हर पल जवानी है !
शबाब हर रात मेरा नया है
फिर कैसे चांदनी पुरानी है !
ज़ाम हो, शीशा हो या दिल
टूट जाना सबकी कहानी है !

Wednesday, January 16, 2013

अंधों के शहर में आइना न मिलेगा
पत्थरों के शहर में शीशा न मिलेगा !
जितनी भी पीनी है पी ले तू ओक़ से
यहाँ तुझको कोई पैमाना न मिलेगा !
जाने क्या सोचा करता है, हर वक्त
किसी पल भी वो अकेला न मिलेगा !
देख ली तुमने अगर तस्वीर हमारी
दिल कहीं और फिर लगा न मिलेगा !
हाथ थामलूँ या तेरी पेशानी चूमलूं
बार बार ऐसा तो मौका न मिलेगा !
अज़ब आलम है मेरी बेचारगी का
मुझ जैसा कोई बावला न मिलेगा !
मन कर रहा है, तुझे शुक्रिया कहूं
तुझ जैसा शख्स दूसरा न मिलेगा !
जिंदगी के दिन थोड़े से ही बचे हैं
क्या खबर थी हमे ख़ुदा न मिलेगा !

Wednesday, January 9, 2013

बहुत दिनों से धूप नहीं निकली ---

भर सर्दी में वो रात भर काँपता रहा
एक चादर में ही गर्मी तलाशता रहा !
सुबह फिर कुहरे में छिप गई धूप
सूरज को सारा दिन पुकारता रहा !
शाम, धुंध के आगोश में आ गिरी
रात भर अँधेरा फिर चीखता रहा !
बहुत दिनों से धूप निकली नहीं
आकाश सल्तनत यूं बांटता रहा !
नाव डूब गई जैसे किनारे पे आकर
हाशिये पर खड़ा बस ताकता रहा !
कभी तो सूरज उसके घर आएगा
उम्मीद पर जिंदगी गुज़ारता रहा !
बेटा भले ही बुज़ुर्ग हो जाये ,माँ से यह कहता है
माँ मुझको सुकून तेरी ही गोद में तो मिलता है !
तेरी दुआओं से ही मेरे दिल में उजाला भरता है
माँ तेरा दिल भी तो बस मेरा ही रस्ता तकता है !
माँ कहती है ,
सफ़र जितना बाकी है यूं ही कट जाये मेरे बेटे
तेरे हाथों की हरारत से मेरा चेहरा निखरता है !
तू ही तो मेरा नटखट कन्हैया भी है मेरे बेटे
तेरी बातों में ही तो मेरा ज़हान भी बसता है !
मगर क्या करूँ, मेरी किस्मत में तो जुदाई है
यह सोच कर दिल मेरा बेहद ही धडकता है !

Sunday, December 23, 2012

नज़र तेरी बुरी है और पर्दा मैं करूं
तेरी हवस का सबब मैं ही क्यूँ बनूं !
मुझे जो मिला मुझी को घूरता मिला
उनकी बदनियत का ज़िक्र क्या करूं !
कब्ज़ा करने की ही फिराक में हैं सब
वहशत का सिलसिला मैं ही क्यूं बनूं !
एक से मुसाफिर हैं तुम भी और मैं भी
दरिंदगी का ज़ुल्म, मैं तन्हा क्यूँ सहूं !
वज़ह बस यह है कि मैं एक लड़की हूँ
संगदिल रिवाज़ों से भी बस मैं ही लडूं !
इज्ज़त के मेरी चिथड़े चिथड़े कर दिए
पत्थरों के शहर में रहूं तो कैसे रहूं !
हादसा न किसी के साथ फिर ऐसा हो
तसल्ली मिल जाये तो फिर मैं चलूं !